I Desire
तेरे इश्क की इंतहा चाहता हू
मेरी सादगी देख क्या चाहता हू
सितम हो कि हो वादा-ए-बेहिजाबी
कोई बात सब्र-आज़मा चाहता हू
ये जन्नत मुबारक रहे जाहिदो को
कि मै आप का सामना चाहता हू
कोई दम का महमान हू ए अहल-ए-महफ़िल
चिराग-ए-सहर हू, बुझा चाहता हू
भरी बज़्म में राज़ की बात कह दी
बड़ा बे-अदब हू, सज़ा चाहता हू
By:- Sir Mohammed Iqbal

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